
वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सियासत और जुर्म की दुनिया के सबसे चर्चित ‘धनंजय सिंह बनाम अभय सिंह’ प्रकरण में आज वाराणसी की विशेष अदालत (MP/MLA कोर्ट) ने ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
*अदालत का फैसला*
न्यायालय ने आज दोपहर सुनवाई के दौरान इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना रुख स्पष्ट किया। साल 2002 के इस बहुचर्चित जानलेवा हमले के मामले में आरोपी:
1. अभय सिंह (विधायक – फैजाबाद)
2. विनीत सिंह (MLC)
3. संदीप सिंह
4. संजय सिंह
5. विनोद सिंह
6. सत्येंद्र सिंह को कोर्ट ने संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए दोषमुक्त (Acquitted) करार दिया है।
*छावनी में तब्दील रही कचहरी*
आज सुबह से ही वाराणसी कचहरी परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम देखे गए। 2 IPS, 3 ACP और 350 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ PAC की टुकड़ियों ने मोर्चा संभाल रखा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे परिसर को अभेद्य किले में बदल दिया गया था।
*क्या था मामला?*
यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब तत्कालीन निर्दलीय विधायक धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास से गुजर रहे थे। आरोप था कि बोलेरो सवार हमलावरों ने उनके काफिले पर अत्याधुनिक असलहों से अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें धनंजय सिंह और उनके गनर-ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हुए थे। धनंजय सिंह ने इस हमले का आरोप अपने धुर विरोधी अभय सिंह और उनके करीबियों पर लगाया था।
*राजनीतिक समीकरणों पर असर*
24 साल चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आए इस फैसले ने न केवल एक पुराने विवाद का पटाक्षेप किया है, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
रिपोर्ट: न्यूज़ अड्डा यूपी
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